प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग (कारण, चिंता व बचाव) । Preganancy mein Bleeding

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वैसे तो गर्भावस्था में मासिक धर्म (पीरियड्स )लगभग बंद हो जातें है लेकिन कई बार प्रेगनेंसी कि पहली तिमाही के दौरान थोड़ी-बहुत ब्लीडिंग (Pregnancy mein Bleeding) की समस्या देखि जा सकती है। आमतौर पर प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में ब्‍लीडिंग या स्‍पॉटिंग (Spotting) होना हमेशा किसी गंभीर परेशानी का संकेत नहीं होता है। आइयें जानें कि प्रेगनेंसी के समय ब्लीडिंग या स्पॉटिंग क्यों होती है?

  • गर्भावस्था में खून आना या स्पॉटिंग क्यों होती है?

  • प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितने दिन होती है?

  • प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितनी होती है?

  • गर्भावस्था में खून आना कैसे रोकें?

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग क्यों होती है? (Pregnancy mein Bleeding Kyu hoti hai)

प्रेगनेंसी के शुरुआत में अगर एक या दो दिन ब्‍लीडिंग हो रही है, तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।लेकिन कई बार कुछ गंभीर कारणों से भी प्रेगनेंट महिला को शुरुआती दिनों में ब्‍लीडिंग या स्‍पॉटिंग हो सकती है।

इसलिए प्रेगनेंसी दौरान अगर ब्लीडिंग 2 या 3 दिन से अधिक हो या रक्स्राव सामान्य से अधिक मात्रा में हो रहा है तो तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या खून आने के कारण निम्न हो सकते हैं (Causes of Spotting or Bleeding During pregnancy in Hindi) :

  • इप्‍लांटेशन ब्‍लीडिंग (यह सुरक्षित है, यानि कि भ्रूण गर्भ में अपने लिए जगह बना रहा है)
  • जुड़वा बच्चे
  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी
  • मोलर प्रेगनेंसी
  • मिसकैरिज

जैसा कि आपने जाना कि प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग मिसकैरिज का भी एक लक्षण हो सकता है। इसलिए अगर आपको प्रेगनेंसी में काला या खून के साथ कुछ टुकड़े जैसा नजर आए तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। लाल, गुलाबी या नॉर्मल खून आने पर भी एक दिन रूक कर डॉक्टर की सलाह और जांच करवाएं।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कब होती है? (Bleeding in Early Pregnancy in Hindi)

सामान्यतः यह स्पॉटिंग या खून या धब्बे की समस्या शुरुआती प्रेगनेंसी (bleeding during early pregnancy) में देखने को मिलती है। अगर आपको स्पॉटिंग प्रेगनेंट होने के पहले या दूसरे महीने में दिखे तो यह नॉर्मल है। तीसरे महीने के बाद भी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो सकती है पर उसके कारण अलग हो सकते हैं और वह गंभीर भी हो सकते हैं। इसलिए तब डॉक्टर की सलाह जरूर लीजिए।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितने दिन होती है?

प्रेगनेंसी के दौरान जब भ्रूण अपनी जगह बना रहा होता है तो आपको दो से तीन दिन तक ब्लड आ सकता है। यह पीरियड्स की तरह पांच या सात दिन नहीं रहता है।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितनी होती है?

जैसा कि हमने बताया कि प्रेगनेंसी में जो ब्लीडिंग होती है वह दो से तीन दिन ही होती है और वह भी केवल धब्बे जैसे आते हैं। अगर यह ब्लीडिंग स्पॉटिंग की जगह यानि धब्बे के स्थान पर पीरियड्स जैसे खून आए तो तुरंत देरी किए बिना डॉक्टरी जांच करवाएं। परंतु धब्बे या स्पॉटिंग पर घबराएं नहीं, यह सामान्य है।

गर्भावस्था में खून आने पर क्या करें? (Pregnancy mein Bleeding par kya kare)

प्रेगनेंसी के शुरुआती दो महीने में अगर कभी कभी खून आए तो यह अपने आप ही खत्म भी हो सकता है। पर अगर कोई समस्या है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लीजिएं। अब जानिएं गर्भावस्था में ब्लीडिंग (Pregnancy mein Bleeding) होने पर क्या करें?

  1. प्रेगनेंसी के दौरान अगर आपको ब्लीडिंग हो रही है, तो सेनेटरी पैड का इस्तेमाल जरूर करें। इससे आपको ब्लीडिंग की सही मात्रा का पता चल सकता है।
  2. प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने पर वजाइनल एरिया में डूश न करें।
  3. प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए।
  4. गर्भावस्था में ब्लीडिंग के दौरान अगर आपको कोई और भी समस्या जैसे पेट दर्द , कमर दर्द ,या सिर चकराने की समस्या हो रही है तो जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लें।
  5. तनाव की स्तिथि से बचें ,मन को शांत रखें और लम्बी साँसों के साथ सांसों को धीरे-धीरे अंदर-बाहर खींचें।
  6. टैम्पोन का इस्तेमाल करें।

प्रेगनेंसी के दौरान स्पॉटिंग रोकने के कुछ घरेलू उपाय

* संतुलित मात्रा में पानी थोड़ी-थोड़ी देर के अंतर में पानी पिएं, जिससे आपका शरीर हाइड्रेटेड रहने में आसानी होगी और ब्लीडिंग में भी कमी आएगी।

* प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग आने पर ज्यादा मेहनत का काम करने से बचें और अधिक वजन न उठायें।

* प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को अधिक-से अधिक आराम देने का प्रयास करें।

* अमरुद की पत्तियों को पीस कर उनका सेवन कर सकतें है इससे भी ब्लीडिंग होने में राहत मिलती है।

* फोलिक एसिड के स्रोत वाले फल और सब्जियां जैसे -केला,पपीता,सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जी खाएं इससे रक्स्राव में जल्द ही आराम मिलता है।

* ग्लूकोस की कमी को दूर करने के लिए ग्लोकोस युक्त पानी पिए इससे शरीर में कमजोरी आने के चांस काम होंगे।

प्रेगनेंसी के दौरान स्पॉटिंग रोकने की दवा

गर्भावस्था के दौरान खून कई बार हार्मोनल समस्या के कारण आ सकता है जिससे बचने के लिए डॉक्टर आपको दवा या इंजेक्शन दे सकते हैं। लेकिन यह दवा या इंजेक्शन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लीजिएं।

प्रेगनेंसी में प्रेगनेंट महिला को ब्लीडिंग होने से शरीर पर पड़ने वाले कुछ प्रभाव

* ज्यादा थकान महसूस होना- प्रेगनेंसी के दौरान अगर महिला को ब्लीडिंग हो रही है तो महिला को सामान्य से अधिक थकान होने लगती है।

* बार-बार प्यास लगना – ब्लीडिंग की वजह से शरीर में तरल की कमी हो जाने के कारण बार -बार प्यास लगती है।

* खून की कमी होना – गर्भावस्था में ब्लीडिंग होने के कारण महिला के शरीर में खून की कमी हो सकती है।

* चक्कर आना – इन दिनों गर्भवती महिला को चक्कर आना आम है।

* दिल की धड़कनें बढ़ना या घबराहट महसूस होना- ब्लीडिंग के कारण महिला को कमजोरी होने लगती है जिस वजह से महिला के दिल की धड़कने बढ़ना तथा घबराहट महसूस होने लगती है।

* पेट में तेज़ दर्द होना – ब्लीडिंग के कारण गर्भवती महिला को पेट दर्द या पेट में ऐंठन की समस्या भी हो सकती है।

गर्भावस्था में स्पॉटिंग होने पर डॉक्टर्स द्वारा किये जाने वाले टेस्ट –

* अगर गर्भावस्था के दौरान महिला को ब्लीडिंग सामान्य से अधिक या 2 -3 दिन से लगातार हो रही है तो डॉक्टर सबसे पहले अल्ट्रासॉउन्ड करते है जिससे गर्भाशय में पल रहे शिशु की स्थिति का पता लगाया जा सके।

* खून की जांच – इसके अलावा डॉक्टर अधिक जानकारी के लिए महिला का ब्लड टेस्ट भी कर सकतें हैं। जिससे ब्लीडिंग होने के अन्य कारणों का पता लगाया जा सके।

* यूरिन टेस्ट – प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने पर कई बार डॉक्टर महिला के यूरिन का टेस्ट भी ले सकते हैं जिससे सही इलाज़ किया जा सके।

प्रेगनेंसी में होने वाली अन्य समस्याओं के लिए यहां क्लिक करेंः BABYMOMTIPS PREGNANCY PROBLEMS

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