बच्चों को बुखार होने पर क्या करें । Bukhar Hone Par Kya Kare in Hindi

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आमतौर पर बच्चों मे बुखार होने कि समस्या अधिकतर देखी जाती है क्योंकि बच्चों मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है और ये समस्या सर्दियों के मौसम मे ज्यादा देखी जाती है। लेकिन अगर संभव हो तो सबसे पहले तुरंत किसी डॉक्टर कि सलाह लें अगर डॉक्टरी मदद मौजूद ना तो आप बुखार के घरेलू उपाय (Bukhar ke Gharelu Upay or Fever Home Remedies) का इस्तेमाल करें। इस ब्लॉग के माध्यम से आपको निम्न सवालों के जवाब मिल सकते हैंः

  1. बच्चों को बुखार क्यों होता है? 
  2. बच्चों में बुखार के लक्षण 
  3. बच्चों को किस प्रकार के बुखार हो सकते हैं
  4. बच्चों को बुखार होने पर घरेलू उपाय 
  5. बुखार में बच्चे को कैसा आहार दें

1- बच्चों को बुखार क्यों होता है?

बुखार आमतौर पर कीटाणुओं के संक्रमण से होता है। बुखार असल में कोई रोग ना होकर किसी रोग का एक अलार्म माना जा सकता है। जब शरीर में किसी बाहरी संक्रमण या वायरस आदि का प्रवेश होता है तो खून में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं शरीर का तापमान ज्यादा करने वाला पैदा करता है। ये पदार्थ मस्तिष्क के तापमान केन्द्र को प्रभावित करते हैं और इससे बुखार हो जाता है।

2- बच्चों में बुखार के लक्षण

  • गर्मी या शरीर का तापमान तेज होना 
  • भूख ना लगना 
  • बच्चे का स्तनपान ना करना 
  • बच्चे का चिड़चिड़ापन या सुस्‍त होना
  • सांसे तेज होना 
  • सिरदर्द, शरीर में अकड़न 
  • कमर में दर्द 

3- बच्चों को किस प्रकार के बुखार (Bukhar) हो सकते हैं

  1. Viral Fever (मौसमी बुखार‌): यह आमतौर पर मौसम  के अचानक  बदलने से होता है जैसे कि बरसात या सर्दियों की शुरुआत के समय। मौसम में आये इस अचानक बदलाव को कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति, बच्चे आदि बर्दाश्त नहीं कर पाते और बीमार हो जाते हैं। 
  2. इंफेक्शन के कारणः बच्चे कई बार इधर उधर की चीजें खाते रहते हैं या मिट्टी आदि को मुंह में डाल लेते हैं। इन सब चीजों से होकर इंफेक्शन पैदा करने वाले किटाणु उनके शरीर में पहुंच जाते हैं।  
  3. कमजोर इम्यूनिटीः नवजात शिशु और छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी बेहद कमजोर होती है। वह बाहरी वातावरण से लड़ने के लिए जरूरी रोग प्रतिरोधकता को मजबूत करने की दिश में होते हैं। इसलिए छोटे बच्चों को अक्सर बुखार का सामना करना पड़ता है।  
  4. अन्य कारणः कई लोग मानते हैं कि दांत आने, टीका लगवाने के बाद आदि के समय बच्चों को बुखार आ जाता है। 

4- बच्चों के लिए बुखार के घरेलू उपाय (Home Remedies for Fever in Babies in Hindi)

     आइएं अब जानते हैं कि बच्चों को बुखार होने पर आप क्या घरेलू उपाय अपना सकती हैं?

  1. ब्रेस्टमिल्क व मां का दूध (Breastmilk) नवजात शिशु के लिए बहुत जरूरी होता है। इसमें मौजूद एंटीबायोटिक्स शिशु को बुखार से लड़ने में मदद देते हैं। 
  2. ठंडे पानी की पट्टी बच्चों को बुखार से आराम देने में आपको काफी मदद कर सकता है।  
  3. गिलोय का रस – लगभग 100 मी .ली .(100ml) गिलोय के रस मे 1 चम्मच शहद मिला कर दिन मे तीन बार बच्चों को पिलाएँ .ये बुखार को खत्म करने क़े लिये बहुत ही लाभदायक नुस्खा है.
  4. तुलसी – तुलसी एक ऐसा औषद्धीय पौधा है जो आमतौर पर ज्यादातर घरों मे पाया जाता है। तुलसी के 6-7 पत्ते -1 कप पानी में उबाल लें, और इसे गुनगुना करके  आधे चम्मच चीनी मिलाकर बच्चे को पीने के लिए दें।
  5. पीपल के फल के चूर्ण को बारीक पीसकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से बुखार में आराम मिलता है।
  6. जायफल को पीसकर बच्चे की  छाती और सिर पर लेप करें। यह बच्चों को बुखार होने पर बहुत  लाभदायक होता है। अगर बच्चा बड़ा है  तो आप उसे जायफल को पीसकर दूध में दे सकती हैं।
  7. जैतून का तेल या ऑलिव ऑयल–जैतून के तेल से बच्चे के तलवों मे मालिश करें इससे जल्द ही लाभ होता है।
  8. बुखार के समय बच्चे को पानी और तरल पदार्थ उचित मात्रा में देना चाहिये  जिससे बच्चे के शरीर मे पानी की कमी ना होने पाए।

ध्यान दें – अगर घरेलू उपचार के बाद भी 1-2 दिनों तक बुखार ना उतरे तो इसे गंभीरता से लें एवं  तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाएँ।

5- बुखार में बच्चे को कैसा आहार दें

बुखार होने पर नवजात शिशु को स्तनपान कराना ना छोड़े। साथ ही छह माह से बड़े बच्चों को आप बुखार होने पर तरल पदार्थ अधिक दें। शिशु को सूप, ताजे फल, ओट्स, दलिया आदि दें। याद रखें बुखार होने पर शिशु खाने के लिए मना कर सकते हैं लेकिन आप उन्हें जबरदस्ती जरूर खिलाएं। थोड़ा थोड़ा ही सही लेकिन बच्चे को खिलाना ना छोड़े। अगर ठोस आहार ना खाए तो सूप, दाल का पानी आदि दें।

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