बच्चों को खुद से खाना खाने की आदत कैसे डालें?

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बच्चों के मातापिता  ज्यादातर ये कहते देखे जाते है कि उनके बच्चे कुछ खाते ही नहीं हैउन्हें कितना भी खिलाने की कोशिश करो मगर वे कुछ नहीं खाते हैंदरअसल हम समझ ही नहीं  पाते कि बच्चों को कबक्या पसंद आएगा ? अक्सर बच्चे उस समय चलनाखेलना सीखते है तो उनको खाने की समझ इतनी नहीं होतीवो खाने को अपने स्वाद के हिसाब से खाते हैउन्हें कबक्या पसंद आएगा, ये तो उन्हें खुद भी नहीं पता होता। और हम तो अब बात कर रहे हैं कि बच्चों को खुद से खाना खाने (Self Feeding) की आदत कैसे डालें? 

दरअसल बचपन में बच्चे की भोजन में रुचि कम होती हैं। इस समय बच्चे खाना भी खाने से मना कर देते हैं। यही वजह हैं कि उसकी भूख भले ही कम ना हो लेकिन वो दिन भर में हर बार खाने में कम खाता हैं। पर बच्चोंं को खुद खाना सिखाने के लिए यही समय सबसे बेहतर होता है। जानें कि बच्चोंं को खुद खाना खाने (Self feeding) की आदत कैसे डाली जाए?

बच्चों को स्वयं खाना खाने की आदत डालने से पहले 

1 साल के बच्चों को माँ के दूध के साथसाथ गाय भैंस का दूध, फलों के रस, हरी सब्जियों के सूप आदि देना शुरू करे। उसके बाद पतली दाल, पतली खिचड़ी या फिर गाजर और आलू को उबालकर उसे मसल कर खिलाएं। केले को दूध में अच्छी तरह से मलकर या चावल के मुरमुरे आदि भी दे सकती हैं। जैसेजैसे बच्चा बड़ा होता जाए तब उसे खिचड़ी, दलिया, सब्जियाँ, दाल भात, दही सूजी इडली, साबूदाना, बिना मसाले की दाल में रोटी चूर कर खिलाये, पहले कम मात्रा में और फिर धीरेधीरे उम्र और बच्चे की भूख के अनुसार मात्रा बढ़ाते जाएं। धीरेधीरे गाजर, बिस्कुट आदि पकड़कर खाने को दें और ध्यान रखें कि बच्चोंं का आहार उनके गले में ना अटके। इस दौरान बच्चे को सिखाये की  खाना चबाके ही खाये

बच्चोंं को खुद खाना खाने की आदत डालने के तरीके (How do I teach my baby to feed himself or Self Feeding?)

बच्चे अक्सर खाने में स्वाद को ज्यादा महत्व देते हैं। जैसे कुछ बच्चोंं को उसके खाने में मीठा पसंद नहीं तो किसी को मसाले, कोई सिर्फ सब्जी खाता हैं तो कोई दही पसंद करता हैं। इसलिए बच्चोंं के खानपान की आदतों को सेहतमंद बनाने के लिए कुछ प्रयास आपको भी करने होंगे और कहते हैं कि बचपन का सीखा कभी नहीं भूलते।

  1. भोजन को बच्चों के हिसाब से बनाएं

बच्चोंं को खाने के लिए दी जाने वाली चीजों को इस तरह बनाएं की बच्चा खुदखुद उन्हें खाने के लिए प्रोत्साहित होउसके भोजन में रंगों का इस्तेमाल करेंउसे उसके कप, प्लेट कटलरी जो उसे पसंद हैं उसमे भोजन देंअगर बच्चा थोड़ा बड़ा हैं तो खाना बनाते समय उसकी थोड़ी मदद ले और खाना पकाने के दौरान उसे उस खास चीज के बारे में बताएं की वह बनने के बाद कितनी स्वादिष्ट होगी।

  1. खाना बदलबदल कर खिलाएं

बच्चोंं को सुबह के नाश्ते, लंच और रात के खाने इन सब में कब क्या खाना चाहिए इसके बारे में बताएं। उदाहरण के तौर पर यदि वह सुबह फल खाना चाहता हैं और रात को आमलेट या दाल रोटी तो इसमें कोई हर्ज नहीं हैं। अपने बच्चोंं के लिए खुद एक मॉडल बनेकई मातापिता खाने के विषय में खुद चूजी होते हैं। इस बात को वह समझ नहीं पाते हैं कि जब वह खुद खाने की चीजों को लेकर नखरे करते हैं तो भला बच्चोंं को कैसे आसानी से खिला सकते हैं। अपनी पसंद के अनुसार बच्चोंं को खाने पीने की चीजें ना दे और ना ही अपने स्वाद अनुसार क्योंकि बच्चोंं के स्वाद और आपके सवाल में काफी फर्क होता हैं।

  1. शुरुआत में खाने कम परोसे

छोटे बच्चोंं को जितनी जल्दी भूख लगती हैं उतनी ही जल्दी उनका पेट भर जाता हैं। इसलिए कोई भी चीज उन्हें पहली बार कम मात्रा में दें यदि वह दोबारा उसकी मांग करता हैं तो उन्हें दोबारा दे। बच्चोंं को सब्जी थोड़ा पकाकर उसकी पूड़ी बनाकर खिलाएंइससे उन्हें सब्जी खाने की आदत लग जाएगी और चुजी नहीं बनेंगे और 1 महीने के बच्चोंं को चबाने वाले कुछ मुलायम फूड आइटम्स दे इससे उन्हें खाने पीने की सही आदत लग जाएगी।

  1. बच्चों के खाना खाते समय उनपर नजर बनाये रखे

आपका बच्चा क्या खाने में ज्यादा रूचि दिखता हैं किसकिस में नखरे करता हैं। उसको किस वक्त क्या पसंद हैं? अगर इन सबपर आप नज़र रखेंगी तो ज्यादा सही समझ पाएंगी।

  1. खुद को भी बच्चों के हिसाब से ढाले

यदि आपको बच्चोंं में अच्छी आदतें डालनी हैं तो खुद भी उनका अनुसरण करना होगा। जैसे कि सुबह नाश्ता जरूर करना, दिन में एक बार तो जरूर खाना आदि। आप जब खुद खाए तो उसे भी कुछ खाने को देआप की देखादेखी उनमें यह हेल्दी आदत के तौर पर पनप जाएगा।

  1. समय निर्धारित करें

बच्चोंं को दिन में कई बार भूख लगती हैं और उसे कई बार कुछ ना कुछ खाने को देना पड़ता हैं। उन्हें थोड़ा अनुशासन सिखाएंयही बात उनके खाने पर भी लागू होता हैं। भोजन के मामले में कैसा के अलावा कब और कितना जैसे प्रश्नों को भी उनके लिए निर्धारित करेंदिन में कितनी बार उन्हें खाना खाना हैं कितनी बार स्नैक्स, इन सब का समय निर्धारित करें तो आपको ही नहीं उन्हें भी आसानी होगी।

  1. बच्चों के खाने के सामान की जगह सेट करे

बच्चोंं के खाने की मनपसंद चीजों की एक जगह बनाए और वहां पर रखेअगर उन्हें भूख भी लग रही होगी और कुछ खाना पीना चाहता हैं तो वह जब मर्जी वहां से खा सकता हैं

बच्चोंं को बताएं

खाना हम क्यों खाते हैं यह बच्चोंं को समझाना बहुत कठिन हैंफिर भी खाने के सेहत संबंधी पहलू पर उनसे अलग अलग तरीके से बात जरूर करेंउन्हें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन जैसी जरुरी चीजों के बारे में बतायेइससे उनमें एक सेहतमंद आहार के प्रति एक रुझान बढेगा।

कुछ मातापिता के लिए

खाना खिलाते समय बच्चों के साथ अत्यंत प्रेम से बात करे 

बच्चों को खाना खिलाते वक़्त अत्यंत प्रेम के साथ पेश आयेबच्चों को खाना खिलाते समय थोड़ी तरकीब लगाए जैसे की एक चम्मच खुद खा कर उनके सामने हस्ते हुए ऐसे बोलेहम्म यम्मीजिससे बच्चा आपको देख खाने में रूचि दिखाएउसको बजाय डराने या धमकाने के प्यार से खाना खिलायेअगर बच्चा खाने में फिर भी आनाकानी करे तो उसकी तरफ से नजरे हटा के खुद धीरे धीरे खाना जारी रखेये देख बच्चा अवश्य आपको देख खाने की लालसा दिखायेगा और खाना खाने लगेगा।  बच्चे की पसंद समझने की कोशिश करे और फिर उसी हिसाब का खाना बदल बदल कर उसे खिलाये

उम्मीद है आप सभी को ये बातें जरूर समझ आयी होंगी, अतः इसे फॉलो करे आपको जरूर इसके परिणाम दिखेंगे!

एक साल के बच्चे को कब क्या क्या खिलाएं? 

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