नवजात शिशु की मालिश से जुड़ी अहम बातें जिसे जरूर जानें | Bachhon Ki Malish

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मालिश ना सिर्फ शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाता है बल्कि मालिश करने से शिशु के शरीर में रक्त का संचार सही बना रहता है। लेकिन मांओं के दिमाग में मालिश (Bachhon ki Malish) को लेकर तरह-तरह के सवाल होते हैं जिनका जवाब हम आपको इस लेख में देने का प्रयास करेंगे। इस लेख में आपको निम्न जानकारियां मिलेंगीः

  1. शिशु की मालिश कब से शुरु करें
  2. बच्चों की मालिश कैसे करते हैं
  3. शिशु के लिए कौन सा तेल मालिश के लिए बेस्ट है
  4. मालिश कितनी देर करनी चाहिए
  5. बच्चों की मालिश कितनी देर करनी चाहिए
  6. मालिश के फायदे

1- शिशु की मालिश कब से शुरु करें  (Bachhon ki Malish kab se Start Kare)

डॉक्टरों के अनुसार शिशु का शरीर शुरुआती सप्ताहों में नाजुक होता है ऐसे में हाथों से दबाव देने पर बच्चे को नुकसान हो सकता है। लेकिन एक महीने के बाद शिशु बेहतर तरीके से बाहरी माहौल में आना शुरु कर देता है। यह सही समय होता है मालिश के लिए। हालांकि एक सप्ताह के बाद आप स्किन को मॉश्चराइज करने के लिए बच्चे को हल्के हाथों से तेल लगा सकती हैं।

यानि हम कह सकते हैं कि एक महीने के बाद शिशु की मालिश शुरु करनी चाहिए, उससे पहले हल्के हाथों से तेल लगाएं। 

2- शिशु की मालिश करने का तरीका? (Bachhon ki Malish Kaise Kare/ Malish ka Tarika)

आइयें अब जानते हैं कि बच्चों की मालिश कैसे करें  या नवजात शिशु की मालिश कैसे की जाती है?

यह भी पढ़ें: नवजात शिशु के लिए कुछ जरूरी टिप्स (Newborn Baby Care Tips in Hindi)
  1. सबसे पहले बच्‍चे को कपड़े उतार कर पीठ के बल लिटाएं। मालिश करते हुए शिशु से बात करते रहें और उसकी आंखों में देखते रहें। 
  2. अब अपने हाथों पर तेल लेकर थोड़ा रगड़े ताकि हथेलियां गर्म हो जाएं। इस गर्माहट से शिशु को बेहतर महसूस होगा। 
  3. बच्चों की मालिश की शुरुआत टांगों से करें। पांव की मालिश करते हुए तलवों व एड़ी पर हल्के हाथों से गोल घुमावदार मालिश भी करें। 
  4. इसके बाद कंधों और हाथ की मालिश करें। 
  5. सीने और पेट के लिए हाथों को गोल-गोल घुमाते हुए मालिश करें।
  6. छाती और पेट की मालिश करते हुए हाथों के दबाव का ध्यान रखें, आपको जरा भी जोर नहीं लगाना है बिलकुल नाजुक हाथों से मसाज करनी है। 
  7. अब शिशु को पेट के बल लिटाकर पीठ और कूल्‍हों आदि की मसाज करें। पेट के बल लेटाते हुए ध्यान रखें कि बच्चे का पेट ना दबे।
  8. आखिर में बच्‍चे की सिर की मालिश करें। 
  9. नवजात बच्चे का सर बहुत कमजोर होता है और उनके सर पर दो जगह बहुत ही मुलायम परत जैसी होती है, उस पर खासकर से कोई भी दबाब नहीं पड़ना चाहिए। 

3- शिशु के लिए कौन सा तेल मालिश के लिए बेस्ट है (Best Oil for Baby Massage in Hindi)

नवजात शिशु की मालिश के लिए सरसों के तेल को सबसे बेहतर माना जाता है। हालांकि शुरुआती मसाज के बाद आप कोई भी अन्य बेबी मसाज ऑयल इस्तेमाल कर सकती हैं। लाल तेल या गाढ़े तेल जिनसे हड्डियां मजबूत होती है का इस्तेमाल तीन माह के बाद ही करना चाहिए। नारियल का तेल और ऑलिव ऑयल भी बच्चों की मालिश के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। नवजात शिशु के लिए मालिश किस तेल से करेंः

  1. सरसों के तेल
  2. नारियल तेल
  3. ऑलिव ऑयल या जैतून का तेल
  4. बेबी ऑयल

4- शिशु की मालिश दिन में कितनी बार करें (Kitni Baar Bachhe ki Malish Kare)

शिशु की मालिश दिन में तीन बार तो अवश्य करें। एक बार सुबह के समय एक दोपहर में नहलाने से पहले और रात को सोने से पहले। मालिश करने से बच्चे को नींद अच्छी आती है।
सर्दियों में भी आप तीन बार मालिश कर सकती हैं, हां इस दौरान तापमान का ध्यान रखें।

5- बच्चों की मालिश कितनी देर करनी चाहिए (Malish Kitni Der Karen)

अमूमन यह निर्भर करता है कि आप शिशु की मालिश कैसे कर रही हैं? और क्या बच्चा मालिश पसंद करता है। अगर बच्चा मालिश पसंद करता है तो आप बीस से तीस मिनट (20 to 30 Minutes) तक मालिश कर सकती हैं। अन्यथा इससे कम देर में भी मालिश खत्म कर सकती हैं।

6- बच्चों की मालिश के फायदें (Benefits of Massage in Hindi)

बच्चों के विकास के लिए जरूरी
मसाज बच्चों की हड्डियों को मजबूत करने के साथ वजन बढ़ाने और ब्लड सर्कुलेशन में भी मदद करता है।

आराम दिलाता है मसाज
बच्चे की रोज मसाज करने से उसे काफी आराम मिलता है और अच्छी नींद आती है। मसाज करने से बच्चों के नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और वह तरोताजा महसूस करते हैं। 

स्किन टोन
मालिश करने से शिशु की त्वचा मुलायम और टोन होती हैं। बच्चों की मालिश करने से उनकी स्किन का मॉश्चर बना रहता है, यह बच्चों को ड्राई स्किन की समस्या से भी आराम दिलाता है। 

इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
मसाज करने से बच्चों के शरीर से हानिकारक रसायन बाहर निकल जाते हैं और वह बीमारियों से बचे रहते हैं। इससे बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है।

मां और शिशु के बीच बॉन्डिंग
मालिश करने से मां और बच्चे के बीच स्किन टू स्किन टच बढ़ता है जिससे बच्चे को मां से लगाव होना शुरु होता है। मालिश करने से बच्चे और माँ के शरीर में ऑक्सीटोसीन हार्मोन बनता हैं जिससे बच्चे और माँ के बीच एक प्यारा सा रिश्ता और भावना बनने में मदद मिलती है।

गैस और कॉलिक से आराम
नवजात शिशु के पेट पर गोल गोल हल्के हाथ से मसाज करने से उन्हें गैस व कोलिक से आराम मिलता है। पेट पर हल्के हाथों से मालिश करने से शिशु का डाइजेशन भी दुरुस्त होता है।

बच्चों की मालिश से जुड़ी अहम बातें (Important Tips about Baby Massage in Hindi)
1. अगर आपका बच्चा जल्दी पैदा हुआ हो यानि प्रीमेच्योर है या उसका वजन कम हो तो उसकी मसाज करने से पहले डॉक्टर से राय अवश्य लें।
2. बच्चों की मालिश नहलाने से पहले करनी चाहिए ताकि बच्चे के शरीर में तेल अच्छे से सोख जाए और उन्हे थोड़ा आराम मिले।
3. बच्चो की मसाज कम से कम 15 से 20 मिनट तक जरूर करे जिससे बच्चे की अच्छे से मसाज हो सके।
4. अगर शिशु मसाज के समय रो रहा हो तो थोड़ी देर रुक जाए और उनका ध्यान कहीं और ले जाने की कोशिश करें। फिर थोड़ी देर के बाद फिर से मालिश करे। बस यह ध्यान रखे कि बच्चे का पेट ज्यादा न भरा हुआ हो नही तो बच्चे को उल्टी भी हो सकती हैं।

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1 Comment

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