प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं? जानें पूरी जानकारी

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प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों से ही गर्भवती महिला के शरीक में कुछ बदलाव आने लग जाते हैं जिसके आधार पर महिला स्वंय ही अपने गर्भवती होने का अनुमान लगा सकती है। लेकिन याद रखें कि सिर्फ प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण (Early Sign of Pregnancy in Hindi) पर भरोसा ना करें। डॉक्टरी जांच, प्रेगनेंसी किट द्वारा जांच आदि के बाद ही आगे बढ़े क्योंकि यह लक्षण हर महिला के लिए अगर अलग हो सकते हैं। तो आइये प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों के बारे में विस्तार से समझते हैंः 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कैसे होते हैं (Pregnancy Ke Shuruwati Lakshan in Hindi)

प्रेगनेंसी  के शुरुआती दिनों  में जी मिचलाना और उल्टी होना तथा बार – बार पेशाब जाना आदि सामान्य  लक्षण  हैं। इसके अलावा  कई बार प्रेगनेंट होने  पर महिला को कमजोरी महसूस  होना सिर चकराना या पैरों में सूजन की समस्या भी देखी  जाती है। 

पीरियड्स आने बंद हो जाना

यह गर्भावस्था का सबसे पहला लक्षण है।  जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके पीरियड्स आना उसी समय से बंद हो जाते हैं। सामान्य प्रेगनेंसी में पीरियड्स का बंद होना जरुरी भी है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं की पीरियड्स के रुकने का मतलब सिर्फ गर्भवती होना ही है  कई बार तनाव ,चिंता के कारण भी मासिक चक्र में परिवर्तन आ जाता है। 

इसलिए अगर पीरियड्स मिस हो गए हैं तो कम से कम सात दिन के बाद प्रेगनेंसी की शुरुआती जांच के लिए किट का इस्तेमाल करना चाहिए। 

इंप्‍लांटेशन ब्लीडिंग 

प्रेगनेंसी के पहले लक्षणों (Early Symptoms of Pregnancy in Hindi) में से एक अहम है इंप्लांटेशन ब्लीडिंग। इसमें खून का धब्बा या गुलाबी रंग का स्राव होता है। दरअसल जब भ्रूण गर्भ में आता है तो वह अपनी जगह बनाता है और इस दौरान यह हल्के खून के धब्बे नजर आते हैं। अगर यह ज्यादा हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

कमर में ऐंठन 

भूर्ण के गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाने पर कमर में ऐंठन सी महसूस होती है। यह प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में होता है। कमर में दर्द हो तो आप हल्की सिकाई कर सकती हैं। 

स्तन के आकर में बदलाव 

गर्भधारण के तीन माह बाद से ही गर्भवती महिला के स्तन में अचानक भारीपन आने लगता है और स्तनों के अक्कर में भी वृद्धि  होने लगती है। 

शरीर का तापमान

प्रेगनेंसी में अक्सर शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा सा बढ़ा हुआ होता है। कई बार लोग इसे बुखार समझ बैठते हैं। यह एक गलत धारणा होती है क्योंकि इस समय बुखार की दवा खाने से कई बार मिसकैरिज होने की भी संभावना बनी रहती हैं। इसलिए अगर पीरियड्स मिस हों और शरीर गर्म लगे तो इसे प्रेगनेंसी का शुरुआती लक्षण समझना चाहिए।  

थकान और अधिक नींद आना 

प्रेगनेंट होने पर महिला को हमेशा थकान महसूस होती रहती है साथ ही साथ महिला की नींद में भी अधिक आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिन भर में जो भी भोजन आप लेतीं है उसी भोजन से भ्रूण को भी पोषण मिलता है जिससे महिला के शरीर में पर्याप्त पोषकत तत्वों की कमी हो जाती है और प्रेगनेंट महिला को थकन , नींद और चक्कर आना आम हो जाता है। 

इसके लिए महिला को अधिक से अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए तथा बार -बार कुछ न कुछ खाना शरीर में जरुरी पौषक तत्वों की पूर्ति करता है। 

भोजन में गंध महसूस होना -प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण पहले महीने में

अगर आपको सामान्य रोटी, दूध, मछली या नॉन वेज से भी अजीब गंध आने लगे जो एकाएक हो तो सतर्क हो जाना चाहिए। यह प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण पहले महीने के आसपास नजर आते हैं। 

खट्टा खाने का मन होना

आमतौर पर महिला को गर्भवती होने पर खट्टा खाने का अधिक मन होता है इससे उन्हें मितली आने से भी रहत मिल जाती है। यह प्रेगनेंसी के बेहद शुरुआती लक्षणों यानि प्रेगनेंसी के पहले और दूसरे महीने के लक्षण माने जाते हैं।

मनोदशा में बदलाव होना

कई बार महिला के गर्भवती होने पर महिला की मनोदशा में काफी बदलाव आतें हैं।  जिस के कारण महिला का मूड ख़राब रहना ,महिला के व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना आम बात हो जाती है।  

ऐसा होने का मुख्य कारण गर्भवती महिला के खून में ईस्ट्रोजन और प्रोजेस्टीरोन की मात्रा बढ़ने की वजह से शरीर में हार्मोन  का स्तर तेजी से बढ़ना होता है। ये बढ़ा हुआ हार्मोन का स्तर आपकी मनोदशा को प्रभावित करता है। 

पेट फूलना

गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही गर्भाश्य महिला का पेट फूलने लग जाता है। यह दो कारणों से होता है पहला महिला की शरीर में बढ़ रहे गर्भ के कारण और दूसरा शरीर में आए हार्मोन्स के परिवर्तन के कारण। इस समय कपड़ों का खास ख्याल रखें और ढीले कपड़े पहने जिससे पेट में दबाब न पड़े। 

जानिएं प्रेगनेंट होने के लिए कौन सा समय बेहतरीन है? 

कब्ज

कई बार प्रेगनेंट महिला को कब्ज की शिकायत भी देखी जाती है, दरअसल प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन आंतों में कसाव पैदा करता है और इस समय अगर आपको शौच में तकलीफ हो रही है, तो यह गर्भावस्था का प्रारंभिक लक्षण (Signs of Pregnancy in Hindi) हो सकता है। 

हॉर्मोन के अचानक बढ़ने की वजह से मलोत्सर्ग कड़ा हो जाता है और पाचन तंत्र से गुजरने  होने वाले भोजन की गति कम हो जाती है। जोकि कब्ज मुख्य कारण बनता है।  

सिरदर्द होना 

सिरदर्द  होना मासिक धर्म के समय का आम लक्षण हैं। शरीर में आए बदलाव और हार्मोन के कारण खून में ग्लूकोस के स्तर में गिरावट आती है जिससे सिरदर्द होता है क्योंकि मस्तिष्क की कोशिकाएं ग्लूकोस के  स्तर में कमी  के साथ तालमेल रखने के लिए अधिक मेहनत करती हैं।

पढ़िए क्या आप प्रेगनेंसी में सेक्स कर सकती हैं?

नोट – अगर आपके पीरियड्स मिस हो गए हैं या उससे पहले आपको इन प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में से कोई नजर आए तो हो सकता है कि आप गर्भवती हो सकती है। लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर गर्भवती होने की पुष्टि नहीं की जा सकती इसलिए ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर प्रेगनेंसी टेस्ट करवाएं साथ ही साथ डाक्टरी सलाह अवश्य लीजिएं। 

प्रेगनेंसी के लक्षण कितने दिन में दिखते है?

प्रेगनेंसी के लक्षण हर किसी में अलग अलग समय दिखते हैं। हालांकि पीरियड्स मिस होने के बाद दस से पंद्रह दिन बाद लक्षण दिखने लगते हैं। यानि भ्रूण के डेढ़ महीने के आसपास आपको अपनी प्रेगनेंट होने के सबूत मिलना शुरु हो जाएंगे।

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